Friday, 3 January 2014

विवाह का एक दूसरा रुप ‘पकडुआ विवाह’

भारत में दीपावली पर्व के बाद और गोवर्धन पूजा खत्म होते ही हिन्दू समाज में शादी-विवाह की धूम शुरू हो जाती है। इस दौरान अपने बच्चों के लिए सही वर तलाशने के लिए लड़की और लड़के पक्ष की भाग-दौड़ शुरू हो जाती है। सबसे ज्यादा भाग-दौड़ बिहार और उत्तरप्रदेश में देखी जाती है। यहां पर दहेज प्रथा भी खूब चलती है। इसी दौरान एक और शादी का माहौल शुरू हो जाता है जिसे पकडुआ विवाह यानी जबरन शादी कहते हैं।

जब मैं पटना में रहता था तो मेरे कमरे के बगल में ही मैथली क्षेत्र से 10 लड़के रहते थे, जो घर से इसी कारण भागकर पटना में रह रहे थे। जब मेरी उनसे बात हुई तो उन्होंने बताया कि हमें पकड़ने के लिए कई लोग पटना आ चुके हैं, मगर हमारे बारे में जब उन्हें सूचना नहीं मिली तो वे वापस लौट गए। अभी मेरी पटना यात्रा के दौरान फिर उन्हीं दोस्तों से मुलाकात हुई तो फिर इस विवाह के बारे में बातें शुरू हो गईं।

यह शादी बिहार के मैथली भाषी इलाकों में सबसे ज्यादा देखने को मिलती है जिसमें बिहार के मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, समस्तीपुर, सहरसा, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, बरौनी जिलों के अलावा पश्चिमी चम्पारण जिलों में खूब देखने को मिलती है। इसी कारण यहां के युवा जब 20 वर्ष के होते हैं तो अपने शहर से दूर भाग जाते हैं जिसके बारे में केवल उनके परिवार को मालूम होता है, अन्य किसी भी रिश्तेदार को नहीं और न ही किसी गांव वाले को। ये युवा समय-समय पर अपने घर भी जाते हैं, मगर सबसे छुपकर।

बिहार में इस शादी का इतिहास बहुत पुराना है। वहां के स्थानीय निवासी और माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रो. डॉ. अरुण कुमार भगत के अनुसार यह परंपरा लगभग 50 सालों से चली आ रही है और कोई इसका विरोध नहीं करता है। स्थानीय निवासी इस तरह की शादियों का विरोध इसलिए नहीं करते हैं कि इसमें न दहेज का टेंशन है और न ही ज्यादा खर्च का।

इस पकडुआ विवाह का शि‍कार बिहार के नावादा का रहने वाला संतोष कुमार आमिर खान के शो 'सत्यमेव जयते' तथा अमिताभ बच्चन के शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में भी आ चुका है। संतोष कुमार ने आमिर खान को बताया था कि उसकी शादी उसकी मर्जी के खि‍लाफ जबरन कर दी गई थी, मगर आज हम दोनों बहुत खुश है और हमें अपनी पत्नी पर गर्व है।

आइए अब आपको बताते हैं कि कैसे होता है पकडुआ विवाह

डॉ. अरुण कुमार भगत के अनुसार यह शादी इस क्षेत्र की परंपरा में शामिल हो गई है। इसमें केवल लड़कों को ही उठा (अपहरण) कर जबरन शादी की जाती है। इस काम को स्थानीय दबंग पूरा करते हैं जिसके बदले में वे लड़की पक्ष से पैसे भी लेते हैं। कभी-कभी यह काम परिवार के सदस्य ही पूरा कर लेते हैं।

उन्होंने बताया कि जब किसी परिवार में लड़कियां शादी की उम्र की हो जाती हैं तो परिवार वाले लड़की के लिए सही वर की तलाश शुरू कर देते हैं। इसके लिए वे शहर में अपनी ही बिरादरी में पढ़े-लिखे युवकों का तलाश करते हैं।

लड़का पसंद आने पर उसके घर वालों से बात करते हैं। जब बात नहीं बनती है तो फिर स्थानीय दबंग से इसके बारे में बातचीत करते हैं। इस दौरान लड़की उस दबंग को राखी भी बांधती है और लड़की वाले इस काम को करने के लिए पैसे देते हैं। अरुण कुमार भगत ने बताया कि स्थानीय दबंग लड़के के फोटो के आधार पर उसका अपहरण कर लेते हैं और उसे लड़की के घर लेकर आते हैं।

उन्होंने बताया कि लड़के का अपहरण करने से पूर्व लड़की के घर चुपचाप शादी की तैयारियां पूरी कर ली जाती हैं जिसमें केवल परिवार के रिश्तेदार और स्थानीय प्रमुख लोग शामिल होते हैं। शादी का समय भी तय कर दिया जाता है और फिर 5 दिन पूर्व लड़के का अपहरण करने के लिए दबंग से कहा जाता है। कभी-कभी लड़का पकड़ में नहीं आता है, उस स्थिति में जब भी लड़का पकड़ा जाता है या कोई अन्य वैसा ही लड़का मिल जाता है तो फिर से नई तारीख देख शादी करते हैं।

स्थानीय दबंग, परिवार के एक-दो सदस्य के साथ मिलकर तय समय पर लड़के का अपहरण कर लड़की वालों के घर लाता है। इस दौरान लड़के का पूरा सर ढंका होता है। पहले उसे एक बंद कमरे में रखा जाता है फिर उसकी मान-मनौव्वल चलती है। जब लड़का नहीं मानता है तो उसे बंदूक से धमकाकर शादी के लिए राजी किया जाता है फिर परिवार के रीति-रिवाज के अनुसार उसकी शादी हो जाती है।

जब लड़के के घर वालों को शादी की जानकारी होती है तो वो लड़की वालों के घर पहुंच जाते हैं। पहले तो मान-मनौव्वल होती है फिर जबरन दबाव डाला जाता है कि वो लड़की को अपनी बहू बनाएं नहीं तो लड़के तथा परिवार के किसी भी सदस्य की हत्या कर दी जाएगी।

उस दौरान तो लड़के पक्ष वाले मान जाते हैं, मगर बाद में जाकर पुलिस स्टेशन में जबरन शादी का मामला दर्ज कर देते हैं। स्थानीय पुलिस जब जांच के लिए आती है तो लड़की पक्ष वालों और स्थानीय लोगों द्वारा माफी मांग लेने व कुछ पैसे देकर इस मामले को दबा दिया जाता है।

मेरे दोस्तों ने नाम व जगह नहीं बताने की शर्त पर बताया कि जबरन शादी तो हो जाती है, मगर कई दिनों तक लड़की और लड़के में बात नहीं होती है और लड़का लड़की और उसके परिवार पर कई तरह के आरोप लगाता है, मगर लड़की कुछ नहीं बोलती है। अंतत: कुछ दिनों के बाद दोनों में बातचीत शुरू हो जाती है।

मेरे दोस्त बताते हैं कि कई मामले तो ऐसे हुए हैं कि शादी से पहले जो लड़का रो रहा था और शादी से मना कर रहा था, लड़की देखने और शादी के बाद बहुत ही खुश दिखाई देता है और परिवार वाले भी सुंदर और सुशील-सी बहू पाकर बहुत खुश होते हैं।

जबरन शादी के बाद युवक की दास्तां...

उन्हीं दोस्तों में से एक बताता है कि मेरी शादी 2006 में इसी तरह हुई थी। जब मैंने लड़की देखा तो अवाक् रह गया और मन ही मन खुश होने लगा और नाराज होने का नाटक करने लगा। शादी के बाद मेरे परिवार वालों की खुशी का ठिकाना नहीं था।

उन्होंने लड़की वालों को इतनी सुंदर बहू देने के लिए बधाई भी दी और घर पर एक सार्वजनिक भोज की व्यवस्था की जिसमें पूरे गांव तथा अपने रिश्तेदारों को बुलाया गया और सबके सामने फिर से हमारी शादी हुई।

उसने बताया कि जब इसके बारे में मेरी पत्नी को मालूम हुआ तो उसने मुझसे बहुत नाराज होने का नाटक किया और सारी घटना की जानकारी अपने परिवार वालों को दे दी। बहुत मान- मनौव्वल और मेरे हाथों का बनाया हुआ खाना खाने के बाद मानी। आज हम दोनों बहुत खुश हैं। दिल्ली में रह रहे समस्तीपुर के एक दोस्त ने बताया कि सभी मामले एक तरह के नहीं होते हैं।

उसने बताया कि कभी-कभी लड़की वालों और दबंग की गलती का खामियाजा लड़की को पूरी जिंदगी भुगतना पड़ता है जिसमें वे गलत लड़के का अपहरण कर लेते हैं। कभी-कभी तो जबरन शादी के बाद ऐसी नौबत आ जाती है कि लड़का इसे अपना अपमान समझ आत्महत्या कर लेता है जिसके बाद लड़की पक्ष पर लड़के की हत्या का मामला दर्ज हो जाता है। 

डॉ. अरुण कुमार भगत बताते हैं कि अब समाज में युवाओं की जागरूकता और परिवार की नई सोच से इस तरह की शादियों में थोड़ी कमी हो गई है, हालांकि अभी भी बिहार के कई क्षेत्रों में इस तरह की शादियां हो रही हैं। इस तरह की शादियों में कमी का मुख्य कारण युवाओं की नई सोच, टेक्नोलॉजी और लव मैरेज के प्रति आकर्षण है। इस विषय पर भोजपुरी में एक फिल्म 'नजरिया तोहसे लागी' बन चुकी है जिसे भोजपुरी में 6 अवॉर्ड मिल चुके हैं।

पकडुआ विवाह का कारण

डॉ. अरुण कुमार बताते हैं कि पकडुआ विवाह दहेज प्रथा के कारण शुरू हुआ। आज भी बिहार में जब लड़की पक्ष वाले किसी लड़के के घर जाते हैं, तो उसके माता-पिता दहेज में 5 से लेकर 20 लाख तक की मांग करते हैं।

हालांकि पहले 10 हजार से लेकर 1 लाख रुपए की मांग करते थे। यह मांग लड़के की नौकरी, शि‍क्षा और परिवार की स्थिति के आधार पर तय की जाती है जिसे लड़की पक्ष वाले देने में असमर्थ होते हैं। इसी के खि‍लाफ सबसे पहले समस्तीपुर में ही आवाज उठाई गई और लड़के का अपहरण कर लड़की की शादी कराई गई।


इस तरह एक मध्यम परिवार की लड़की की शादी उच्च परिवार में हुई। इसके बाद से ही यह रिवाज मैथली भाषायी क्षेत्र के साथ अन्य क्षेत्रों में शुरू हो गया और आज यह प्रचलन बन गया है।