Monday, 13 January 2014

यह कैसा समाज !!

भारत में पिछले 2 सालों में यौन उत्‍पीडन जैसे मामले की बाढ़ आ गई है। इसमें से कुछ राजनीतिक मामले बने तो कुछ, बड़ पदों पर बैठे लोगों के लिए मुसीबत। कहने का तात्‍पर्य यह है कि भारत में जहां एक तरफ महिलाओं को देवी समझा जाता है उसी समाज को 2012 के दिसंबर में दिल्‍ली में हुए सामुहिक दुश्‍कर्म मामले ने पूरे देश के हिला कर रख दिया। इससे पहले बहुत सारे यौन उत्‍पीडन के मामले बने मगर, हर समय साक्ष्‍य के अभाव में अपराधी मुक्‍त हो जाते थे।

2012 के घटना के बाद भारत में महिलाओं को यौन उत्‍पीडन से बचाने के लिए यौन उत्‍पीडन हिंसा कानून 2012 बना जिसमें, अगर कोई व्‍यक्ति किसी भी महिला से आप्‍पतीजनक बाते करता है, उससे ज्‍यादा देर तक घुरता है, अश्‍लील इशारे करता है, उसे छेड़ता है या फिर उसे घमकाकर उसके साथ दुराचार करता है, तो वह इस कानून के तहत दोषी करार दिया जाएगा।

भारत में जैसे ही यह कानून पास हुआ, देश के अलग-अलग हिस्‍सों से इस तरह की घटनाओं की बाढ़ आ गई। कुछ महिलाओं ने पुरुषों को नीचा दिखाने के लिए इस कानून का प्रयोग किया तो कुछ पहले यौन हिंसा की शिकार महिलाओं ने पुलिस में रिपोर्ट लिखवाना शुरु किया। इसे देख कर तो ऐसा लगता है कि अब महिलाओं में जागरुकता फैल गई है और वो खुलेआम पुरुषों का मुकाबला कर रही हैं।

वहीं दूसरी तरफ समाज के अन्‍य लोगों के इसारे पर महिलाएं लगातार इस तरह के कानून की धज्जियां उडा रही है। अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्‍यायधीस  ए सज्‍जन के खिलाफ भी एक लॉ इटर्न ने यौन उत्‍पीडन का मामला दर्ज कराया है। इससे पहले जस्टिस गांगुली और तहलका के संस्‍थापक संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ इसी तरह का मामला चल रहा है।
इन सब के बावजुद भी यौन उत्‍पीडन के मामले में कमी नहीं देख जा रही है और रेप की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है। रोज समाचार-पत्रों एवं चैनलों पर कई शहरों से लगभग  खबरें आ ही जाती है। अभी इंदौर के ही खालसा कॉलेज की सहायक प्रोफेसर ने भूमाफिया बॉबी पर इसी तरह का आरोप लगाया है।

इस तरह की रोजाना आ रही खबरों से अब हमारे समाज पर प्रश्‍नचिन्‍ह उठ खडा हुआ है। क्‍या महिलाएं केवल यौन उत्‍पीडन के लिए बनी है? क्‍या समाज में रहने वाला उस व्‍यक्ति के घर में अपनी कोई मां-बहन या फिर पत्‍नी नहीं है क्‍या, जिसने यह अपराध किया है? आज जो बड़े पदों पर बैठे हैं उनके लिए गरीबों या मध्‍यम वर्ग के महिलाओं के पास अपना कोई सम्‍मान नहीं है क्‍या? अगर कोई उनके घर के महिला सदस्‍यों के साथ ऐसा करे तो उन्‍हें कैसा लगेगा? वो फिर अपनी पहुंच का इस्‍तेमाल कर आरोपियों को सजा दिलवा देते हैं। और हॉ, हमारा कानून भी उनकी ही सहायता करता है ना कि गरीबों का। इसे हम कौन सा समाज कहेंगे?


आप सोंचिए और बताईए कि हम किस समाज में रह रहे हैं और समाज को असभ्‍य रास्‍ते पर ले जाने वालों के साथ किस तरह का व्‍यवहार करना चाहिए?