Wednesday, 5 March 2014

ट्रेन का सफरनामा

मैं कल अपने गांव से इंदौर लौट रहा था। मैंने भोपाल से इंदौर के लिए शाम को करीब 5 बजे इंटरसीटी ट्रेन का इंदौर के लिए टिकट लेकर समान्‍य कोच में बैठ गया। शायद मैं बहुत दिनों के बाद किसी भी ट्रेन के समान्‍य कोच में बैठा था। ट्रेन इंदौर के लिए चल पड़ी। ट्रेन में बहुत भीड़ थी। मैं ट्रेन में बैठे लोगों के गतिविधियों को देखने लगा। मेरे बगल में ही कुछ विद्यार्थी किसी कॉलेज में लौट रहें थे। उन्‍होंने अपना सफर को खुशनुमा बनाने के लिए आपस में ही तीन ग्रुप में बंट गए। दो ग्रुप अंताबछड़ी(गानों की प्रतियोगिता) खेलने में व्‍यस्‍त हो गया जिसका साथ कोच में खड़े लोग व महिलाएं भी दे रही थी। सभी को लोगों को बहुत ही मजा आ रहा था। वहीं दुसरा ग्रुप पहले तो उस दिन का पुरा हिसाब करता रहा मगर उसके बाद वो विज्ञान व समान्‍य ज्ञान के बातों में लग गए। उन्‍हें अपने अन्‍य ग्रुप की तरह अन्‍य लोगों का साथ नहीं मिल रहा था। इसके बावजुद वो आपस में इस दूसरे का ज्ञानवर्धन कर रहे थे। इसी दौरान कभी चाय, कॉफी, चने, चना चटपटा, तथा चिप्‍स व पॉपकॉन बेचने वाले भी आ जाते थे। इसी बीच एक मनुष्‍य की तीसरी लिंग(छक्‍का) आकर लोगों से जबरन पैसे वसुलने लगे।

ट्रेन अबतक मक्‍सी स्‍टेशन पार कर चुकी थी। पहले दोनों ग्रुपों ने अपना खेल खत्‍म कर आपस में फोटो खिचने में वयस्‍त हो गए। इस दौरान तीसरा ग्रुप में शामिल हो गया। वहीं दुसरी तरफ कुछ लोग सीट के लिए आपस में लड़ बैठे। दोनों ही एक-दूसरे पर धक्‍का देने का आरोप लगा रहे थे। दोनों की लड़ाई इतनी तेज हो रही थी की वहां उपस्थित सभी लोगों का ध्‍यान वहां आ गया था और कुछ लोग तो उन्‍हें लड़ने से बचा भी रहे थे। बात तब और बिगड़ गई जब उन्‍हे रोकने गई एक महीला को ही अपशब्‍द सूनने पड़े। अबतक देवास स्‍टेशन आ गया था।


अब सभी लोग ट्रेन के जल्‍द से जल्‍द इंदौर पहुंचने की प्रतिक्षा कर रहे थे। ट्रेन आखिरकार 10 बजे इंदौर पहुंच गई और सभी अपने घर की ओर निकल पड़े। मैं भी होटल से खाना पैक करा कर स्‍टेशन से ऑटो लेकर अपने घर की ओर निकल गया। बहुत दिनों के बाद हुई इस समान्‍य कोच का सफर कई मायनों में यादगार हो गया जहां मैंने देखा भी लोग आज भी ट्रेन और बसों में सीट के लिए लड़ते है और उस सीट पर किसी और व्‍यक्ति को बैठने नहीं देते हैं वहीं वर्षो पुरानी चली आ रही खेल आज भी ट्रेन की इस समान्‍य कोच के माध्‍यम से जारी है।